वजीरगंज (गया): एक तरफ सरकार ‘नमामि गंगे’ और ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर जल स्रोतों को बचाने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर गया जिले के वजीरगंज नगर पंचायत में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ की जीवनदायिनी मानी जाने वाली जोकहरी (जोकरी) नदी अब कूड़ेदान में तब्दील हो चुकी है, और विडंबना यह है कि इसे प्रदूषित करने वाले कोई और नहीं बल्कि स्वयं नगर पंचायत के सफाईकर्मी हैं।कचरे के ढेर में दफन होती नदी स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत के सफाईकर्मी शहर भर का कचरा इकट्ठा कर उसे डंपिंग यार्ड ले जाने के बजाय चुपके से जोकहरी नदी के तट पर या सीधे नदी में फेंक रहे हैं। प्लास्टिक, सड़े-गले पदार्थ और नगर का सारा अपशिष्ट अब इस बरसाती नदी की पहचान बन चुका है। तिहरी मार झेल रही जोकहरीजोकहरी नदी वर्तमान में तीन बड़े संकटों से जूझ रही है। अतिक्रमण का जाल: नदी के किनारों पर अवैध कब्जों ने इसके स्वरूप को संकरा कर दिया है। नालियों का जहर: नगर की गंदी नालियों का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नदी में गिराया जा रहा है। कचरा डंपिंग: अब नगर पंचायत द्वारा फेंका जा रहा कूड़ा रही-सही कसर पूरी कर रहा है।प्रशासनिक उदासीनता पर सवालनदी को बचाने की प्राथमिक जिम्मेदारी नगर निकाय की होती है, लेकिन यहाँ “रक्षक ही भक्षक” वाली स्थिति बनी हुई है। एक बरसाती नदी होने के कारण इसमें साल भर पानी नहीं रहता, जिससे जमा हुआ कचरा सड़कर महामारी को न्योता दे रहा है और भूजल स्तर को भी दूषित कर रहा है।”यह केवल नदी प्रदूषण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर सफाईकर्मी ही कचरा नदी में डालेंगे, तो आम जनता से स्वच्छता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” — एक स्थानीय पर्यावरण प्रेमी
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