वजीरगंज (गया): गया जिले के वजीरगंज प्रखंड अंतर्गत सिंगठिया गाँव और आसपास के क्षेत्रों के लिए आज का दिन एक गहरे शून्य और शोक की लहर लेकर आया। शिक्षा जगत के अनमोल रत्न, तुलसी विद्या मंदिर उच्च विद्यालय (सिंगठिया) के संस्थापक एवं पूर्व प्रधानाध्यापक श्याम कुमार सिंह उर्फ ‘सिद्धि बाबू’ का पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही शिक्षा प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई।
त्याग की प्रतिमूर्ति: सरकारी नौकरी छोड़ शुरू किया शिक्षा का यज्ञ
सिद्धि बाबू का जीवन त्याग और संकल्प की एक ऐसी गाथा है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
ऐतिहासिक निर्णय: वर्ष 1980 में, उन्होंने उच्च विद्यालय जगतीवर डीहा (गुरारू) में वरिष्ठ गणित शिक्षक के सुरक्षित और प्रतिष्ठित सरकारी पद से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया।
संकल्प: उनका उद्देश्य अपने पैतृक क्षेत्र में बंद पड़े विद्यालय को पुनर्जीवित करना था। इसी संकल्प से ‘तुलसी विद्या मंदिर’ की नींव पड़ी, जहाँ उन्होंने 1981 से 2010 तक प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘आंखों पर काली पट्टी’ और ‘पदयात्रा‘
सिद्धि बाबू केवल अक्षर ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं थे, बल्कि वे नैतिकता के प्रहरी भी थे। उन्होंने स्थानीय दबंगों और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसी लड़ाई लड़ी जो इतिहास में दर्ज हो गई:
काली पट्टी का विरोध: सरकारी भवन कोष के दुरुपयोग के विरोध में उन्होंने लगातार 10 महीनों तक अपनी आंखों पर काली पट्टी बांधे रखी थी।
लोक-संग्रह: उन्होंने जनता से सीधे जुड़ने के लिए ‘शिक्षा पत्र’ अभियान चलाया और छह जिलों के सैकड़ों गांवों में पदयात्रा कर जन-सहयोग जुटाया।
ईमानदारी की मिसाल: आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने के लिए उन्होंने सरकारी धन को वापस खजाने में जमा कराकर यह संदेश दिया कि शिक्षा का मंदिर शुद्धता से चलना चाहिए। उनके इसी गांधीवादी दर्शन के कारण उन्हें क्षेत्र में “सकरदास का गांधी” कहा जाने लगा।
पूरे इलाके में शोक
सिद्धि बाबू के निधन पर उनके पैतृक गाँव कोरमथु और सिंगठिया सहित पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है। विद्यालय परिवार और उनके शिष्यों ने उन्हें नम आँखों से श्रद्धांजलि देते हुए कहा:
”सिद्धि बाबू का जाना एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जिस ज्ञान के पौधे को अपने खून-पसीने से सींचा था, आज वह विशाल वृक्ष बन चुका है, लेकिन आज उस वृक्ष का माली हमें छोड़कर चला गया।”
शोक व्यक्त करने वाले में शिक्षा प्रेमी सरपंच संघ के जिला उपाध्यक्ष महेश कुमार सुमन,जिला पार्षद छोटू दास, समाज सेवी मगही साहित्यकार संजीत बकथरिया आदि शामिल रहे