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वजीरगंज। प्रखंड के किसानों को ठगने के लिए साइबर अपराधियों ने अब एक नया और बेहद घातक पैंतरा अपनाया है। ठग अब केवल अंधाधुंध कॉल नहीं कर रहे, बल्कि वे पूरी तैयारी के साथ किसानों को अपना निशाना बना रहे हैं।
क्षेत्र से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, ठगों के पास किसानों का कच्चा चिट्ठा मौजूद है। वे फोन पर निम्नलिखित जानकारियां देकर किसानों का विश्वास जीत रहे हैं:
सटीक पहचान: ठग फोन करते ही किसान का सही नाम बताते हैं।वे किसान के क्षेत्र के ‘किसान सलाहकार’ का सही नाम भी लेते हैं, जिससे किसान को लगता है कि फोन वास्तव में सरकारी दफ्तर से आया है।
किसानों को सीधे कहा जा रहा है कि आपकी 30,000 से 35,000 रुपये की एकमुश्त राशि रुकी हुई है। ‘फाइल क्लियर’ करने या ‘प्रोसेसिंग’ के नाम पर 8,000 से 10,000 रुपये की मांग तुरंत करते हैं। उनका दावा होता है कि जैसे ही आप यह छोटा हिस्सा भेजेंगे, बड़ी राशि आपके खाते में क्रेडिट हो जाएगी।
किसान भाई इस ‘ट्रैप’ को ऐसे समझें:
सरकारी प्रक्रिया: कोई भी सरकारी विभाग (कृषि या बैंक) कभी भी लाभ राशि भेजने के बदले आपसे पहले पैसे (रिश्वत या फीस के रूप में) नहीं मांगता। यदि राशि स्वीकृत है, तो वह सीधे आपके DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए खाते में आती है।
डेटा चोरी: ठगों के पास आपका नाम या सलाहकार का नाम होना इस बात का सबूत नहीं है कि वे अधिकारी हैं। आजकल डेटा आसानी से इधर-उधर से चुराया जा सकता है।
धमकी या जल्दबाजी: ठग अक्सर कहते हैं कि “अभी पैसा भेजिए वरना फाइल रिजेक्ट हो जाएगी।” ऐसी जल्दबाजी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
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क्रॉस-वेरिफिकेशन: जैसे ही ठग किसी किसान सलाहकार का नाम ले, तुरंत फोन काटें और खुद उस किसान सलाहकार को फोन लगाकर सच्चाई जानें।
नकद या ऑनलाइन ट्रांसफर न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर PhonePe या Google Pay के माध्यम से एक रुपया भी न भेजें।
नंबर ब्लॉक करें: ऐसे संदिग्ध नंबरों को तुरंत ब्लॉक करें और पुलिस को सूचित करें।
विशेष अपील: किसान भाई ध्यान दें, ठग आपके भरोसे का फायदा उठा रहे हैं। सरकार आपसे पैसा लेकर पैसा नहीं देती। किसी भी संशय की स्थिति में सीधे प्रखंड कृषि कार्यालय (वजीरगंज) जाकर संपर्क करें।







