पटना| बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने आखिरकार सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा को रद्द करने का आधिकारिक फैसला सुना दिया है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच परीक्षा में भारी अनियमितता और ‘पेपर लीक’ की चर्चाएं तेज थीं, जिसके बाद आयोग ने आज यह कड़ा कदम उठाया।
क्यों रद्द हुई परीक्षा?
आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच आयोजित हुई परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर गड़बड़ी और कदाचार (Malpractice) के प्रयास पाए गए। जांच में सामने आया कि:
हाई-टेक नकल: नालंदा और छपरा जैसे जिलों में ब्लूटूथ और चप्पलों में छिपे डिवाइस के साथ अभ्यर्थी पकड़े गए।
32 अभ्यर्थी बैन: धांधली में शामिल पाए गए 32 अभ्यर्थियों को भविष्य की सभी परीक्षाओं से प्रतिबंधित (Debarred) कर दिया गया है।
बायोमेट्रिक विवाद: आरोप है कि जिस एजेंसी को बायोमेट्रिक का काम दिया गया था, उसे पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, जिससे सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठे।
छात्रों का आक्रोश और विरोध
परीक्षा रद्द होने की खबर मिलते ही अभ्यर्थियों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ मेहनती छात्र इस फैसले से राहत महसूस कर रहे हैं कि धांधली करने वाले सफल नहीं हो पाएंगे, वहीं दूसरी तरफ 10 लाख से अधिक उम्मीदवार अपनी मेहनत और समय की बर्बादी को लेकर आक्रोशित हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकार और आयोग को परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और चयन प्रक्रिया में शामिल एजेंसियों की पारदर्शिता पहले ही सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
आयोग का पक्ष
BPSC अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पेपर लीक का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला, लेकिन परीक्षा की शुचिता (Integrity) को बनाए रखने के लिए इसे रद्द करना आवश्यक था। उन्होंने आश्वासन दिया कि नई परीक्षा तिथि की घोषणा जल्द ही की जाएगी और भविष्य में 6-लेयर सुरक्षा और GPS-ट्रैक्ड ट्रांसपोर्ट जैसे कड़े नियम लागू किए जाएंगे।
आगे क्या?
AEDO के साथ-साथ सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा भी रद्द कर दी गई है।
अगली परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को नए सिरे से एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) उन गिरोहों की जांच कर रही है जो इस धांधली के पीछे सक्रिय थे।