
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बहुमत खोने के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद राज्य में राजनीतिक और संवैधानिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगी, जिससे अब सबकी नजरें राजभवन और संवैधानिक प्रावधानों पर टिक गई हैं।
1. बहुमत खोने पर क्या कहता है संविधान?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं। इसका अर्थ यह है कि मुख्यमंत्री केवल तब तक पद पर बने रह सकते हैं जब तक उन्हें सदन में बहुमत प्राप्त हो। चुनाव परिणामों में यदि कोई दल स्पष्ट बहुमत हासिल कर लेता है, तो निवर्तमान मुख्यमंत्री का पद छोड़ना एक स्थापित परंपरा और संवैधानिक आवश्यकता है।
2. राज्यपाल की भूमिका और शक्तियाँ
ऐसी स्थिति में जहाँ मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से मना कर दें, राज्यपाल के पास निम्नलिखित विकल्प होते हैं:
बर्खास्तगी का अधिकार: यदि चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल के पास बहुमत नहीं है, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर राज्यपाल पहले मुख्यमंत्री को स्वेच्छा से इस्तीफा देने का अवसर देते हैं।
फ्लोर टेस्ट (Floor Test): राज्यपाल मुख्यमंत्री को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकते हैं। यदि मुख्यमंत्री सदन के पटल पर बहुमत साबित नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें पद छोड़ना ही होगा।
नई सरकार को आमंत्रण: बहुमत प्राप्त दल (इस मामले में भाजपा, जिसने 207 सीटें जीती हैं) के नेता को राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। नई सरकार के शपथ लेते ही पुरानी सरकार का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाता है।
3. क्या अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लग सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संवैधानिक मशीनरी पूरी तरह ठप हो जाती है और मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं होतीं, तो राज्यपाल केंद्र को अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। हालांकि, यह अंतिम विकल्प माना जाता है।
4. विशेषज्ञों की राय
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस्तीफा देना केवल एक औपचारिकता है। पूर्व नौकरशाह जवाहर सरकार के अनुसार, “जैसे ही वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होता है, मुख्यमंत्री का पद स्वतः ही प्रभावहीन हो जाता है। यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तो भी वे संवैधानिक रूप से पद पर बने रहने का अधिकार खो देती हैं।”
