पटना। बिहार में नवनियुक्त प्रधान शिक्षक (Head Teacher) व प्रधानाध्यापक (Head Master) की महीनों से लटकी सैलरी का मामला अब आगे बढ़ा है। The Ashoka Times की खबर का बड़ा असर हुआ है — शिक्षा विभाग ने हरकत में आकर HRMS पोर्टल को अपडेट किया, सैलरी निर्धारण प्रक्रिया पूरी हुई और कई शिक्षकों को वेतन मिलना शुरू हो गया है।
लेकिन राहत के बीच अब एक नया पेंच सामने आया है। विभागीय लापरवाही या तकनीकी उलझन कहें — कई ऐसे प्रधान शिक्षक हैं जिनकी सैलरी फिर से अटक गई है। दरअसल, इन शिक्षकों ने जिस महीने प्रधान शिक्षक के पद पर योगदान दिया, उसी महीने कुछ दिनों तक वे शिक्षक पद पर कार्यरत भी थे। चूंकि दोनों पदों के वेतन में अंतर है, विभाग ने उस महीने के लिए शिक्षक पद का पूरा वेतन जारी कर दिया था। अब जब वही महीने में प्रधान पद पर योगदान करने वाले शिक्षकों की फाइल सामने आई, तो विभाग ने उनका प्रधान पद का वेतन रोक दिया है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग का कहना है कि जिन शिक्षकों को उस महीने शिक्षक पद का “एक्सट्रा” वेतन मिल गया था, उन्हें पहले वह राशि वापस करनी होगी, तभी प्रधान पद की सैलरी जारी की जाएगी। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
फिलहाल, जिन प्रधान शिक्षकों ने उस महीने योगदान किया था, उन्हें अब तक एक भी महीने की सैलरी नहीं मिली है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। सवाल उठ रहा है कि अगर सरकार ने दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के समय वेतन नहीं दिया, तो अब जब सैलरी मिलना शुरू हुआ है, तो उसे जोड़-घटाकर या अगले महीने से भुगतान क्यों नहीं किया जा सकता था?
शिक्षक संगठन का कहना है कि अगर विभाग को समायोजन की तकनीकी दिक्कत लग रही थी, तो उसे संबंधित महीने का भुगतान बाद में एडजस्ट कर देना चाहिए था। आखिरकार प्रधान शिक्षक का वेतन तो शिक्षक से अधिक ही होता है, ऐसे में विभाग का यह रवैया न केवल शिक्षकों के साथ अन्याय है बल्कि सरकारी तंत्र की नीयत पर भी सवाल खड़े करता है।
The Ashoka Times की रिपोर्ट का असर दिखा, पर शिक्षकों की परेशानी अब भी जस की तस — विभाग से अब स्पष्ट दिशा की उम्मीद।

