गया: जिला के विभिन्न घरों में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ ‘करम पूजा’ का त्योहार मनाया गया. इस पावन अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उनकी सुख-समृद्धि की कामना को लेकर पूरे विधि-विधान के साथ मंगलवार को करम देवता की पूजा-अर्चना की. पर्व को लेकर व्रती बहनों ने पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर कठोर व्रत का पालन किया.
पूजा दौरान बहनों ने


“करही ही कर्मा पूज ही झार,अपन करम भैया के धर्म झार मुड़ बड़ीआब ही (जुड़ाबेली ), हमर भैया सोझ” कहते हुए अपने सर के बाल को झार से मिलाती हुए परंपरा का पालन करती हैं।
पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहनों ने करम पूजा के दौरान गौरी-गणेश के साथ-साथ ‘झूर’ की भी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की. बुधवार को सुबह स्नान-पूजन के बाद मिष्ठान, फल और अन्य पारंपरिक पकवानों का पारण कर व्रती बहनें अपना उपवास तोड़ेंगी. इससे पहले पूजित शिव-गौरी और झार को जल में विसर्जित किया जायेगा, इस दौरान बच्चों का उत्साह चरम पर होता है और वह पंरपरा को याद दिलाते हुए जोर-जोर से एक साथ यह भी कहते नजर आते है आब गौरा, जा गौरा भादो में बोलैबो गौरा, बासी भात खिलइबो गौरा, चूल्हा में सुतैयबो गौरा,
और जबतक विसर्जन के लिए पूजा स्थल से शिव-गौरी नहीं ले जाया जाता तब तक व्रतियों घरों में चूल्हा नहीं जलता यह भी इस करम पूजा के परंपरा में शामिल है।
बासी खाने की है पारंपरिक मान्यता–
पौराणिक मान्यताओं और परंपरा के तहत व्रती घरों में मंगलवार को ही विशेष रूप से भोजन पकाया गया, जिसे ‘बासी’ के रूप में अगले दिन यानी बुधवार को ग्रहण किया जाएगा. इधर, करम पूजा के इस पावन पर्व को लेकर शहर की महिलाओं और उनके परिजनों में विशेष उत्साह देखा गया.
